Annapurna Stotram | अन्नपूर्णा स्तोत्रम्

Annapurna Stotram – अन्नपूर्णा स्तोत्र भगवान शिव की देवी अन्नपूर्णा को समर्पित एक प्रमुख स्तोत्र है, जिसे श्रद्धा भक्ति से पढ़ा जाता है। यह स्तोत्र देवी अन्नपूर्णा की महिमा को गाता है और उनकी कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए प्रार्थना किया जाता है।
अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ भक्ति और आशीर्वाद की इच्छा के साथ किया जाता है, और यह देवी अन्नपूर्णा के प्रति भक्त की संवादना और श्रद्धा को व्यक्त करने का एक माध्यम होता है।

Annapurna Stotram – अन्नपूर्णा स्तोत्र पढ़ने का फायदा

1. मानसिक शांति: अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करने से मानसिक शांति और सुकून की भावना हो सकती है। यह ध्यान और भक्ति में एक अच्छा माध्यम हो सकता है, जो आपको तंत्रिक चित्त और आंतरिक सुख की प्राप्ति में मदद कर सकता है।

2. आशीर्वाद: देवी अन्नपूर्णा का स्तोत्र करने से आप उनके आशीर्वाद की प्राप्ति की इच्छा कर सकते हैं। यह आपकी जीवन में सुख और समृद्धि को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।

3. अन्नदान की महत्वपूर्ण भूमिका: अन्नपूर्णा स्तोत्र के माध्यम से आप अन्नदान की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति समझ पा सकते हैं। यह आपको अन्नदान की महत्वकांक्षा को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है और दान करने का प्रेरणा मिल सकता है।

4. धार्मिक सांविधानिकता: अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ करने से आप अपने धार्मिक सांविधानिकता को मजबूत कर सकते हैं और अपने धार्मिक आदर्शों का पालन करने की प्रेरणा पा सकते हैं।

यह फायदे व्यक्ति की श्रद्धा और भक्ति पर भी निर्भर करते हैं, लेकिन यह स्तोत्र ध्यान, संतुष्टि, और आत्मा के अद्वितीय अनुभव का साधना करने में मदद कर सकता है।

Annapurna Stotram

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरी
निर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।
प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१॥

nityānandakarī varābhayakarī saundaryaratnākarī
nirdhūtākhilaghorapāvanakarī pratyakṣamāheśvarī ।
prāleyācalavaṃśapāvanakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 1 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी वह देवी हैं जो हमें नित्य आनंद, वरदान और सौन्दर्य की रत्ने देती हैं, और वह हमारे सभी कठिनाइयों को दूर करती हैं। वह काशीपुर के आधीश्वरी हैं, जो प्रालेय चलवंश को शुद्ध करती हैं और हमें भिक्षा करने का आशीर्वाद देती हैं।

 

नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरी
मुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी ।
काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥२॥

nānāratnavicitrabhūṣaṇakarī hemāmbarāḍambarī
muktāhāravilambamānavilasadvakṣojakumbhāntarī ।
kāśmīrāgaruvāsitāṅgarucirā kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 2 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी वह देवी हैं जो नाना प्रकार के रत्नों और चित्रकलाओं से सजीव हैं, और उनके वक्षस्थ भिक्षापात्र में मुक्ति की माला लटकती है। वह काशीपुर की आधीश्वरी हैं, जो काश्मीर आगरु की आरोहण करने वाली हैं, और वह हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरी
चन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।
सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥३॥

yogānandakarī ripukṣayakarī dharmārthaniṣṭhākarī
candrārkānalabhāsamānalaharī trailokyarakṣākarī ।
sarvaiśvaryasamastavāñchitakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 3 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी योगानन्द, शत्रुओं का नाश करने वाली, धर्म और अर्थ में निष्ठा करने वाली हैं। उनके चेहरे की चाँदनी, सूर्य की किरनों की तरह चमकती है, और वह सभी तीन लोकों की सुरक्षा करती हैं। वह सभी धन और ऐश्वर्य की पूर्ति करने वाली हैं और काशीपुर की आधीश्वरी हैं, जो हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करी
कौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी ।
मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥४॥

kailāsācalakandarālayakarī gaurī umā śaṅkarī
kaumārī nigamārthagocarakarī oṅkārabījākṣarī ।
mokṣadvārakavāṭapāṭanakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 4 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी कैलास पर्वत के कंदरालय में विराजमान हैं, वह गौरी उमा के रूप में भी जानी जाती हैं, और वह शंकर की सहधर्मिणी हैं। वह कुमारी हैं, जो निगम और अर्थ को समझती हैं, और उनके ओंकार बीजाक्षर से मोक्ष की प्राप्ति होती है। वह मोक्ष और द्वारका के पाटों का काव्य करती हैं, और काशीपुर की आधीश्वरी हैं, जो हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरी
लीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।
श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥५॥

dṛśyādṛśyavibhūtivāhanakarī brahmāṇḍabhāṇḍodarī
līlānāṭakasūtrakhelanakarī vijñānadīpāṅkurī ।
śrīviśveśamanaḥprasādanakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 5 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी दृश्य और अदृश्य की विभूतियों को वहन करने वाली हैं, वह ब्रह्माण्ड के भाण्ड को धारण करती हैं, और उनकी लीलाएँ नाटक सूत्रों की भांति हैं, जो विज्ञान की ज्ञान भंडार की ओर इशारा करती हैं। वह श्रीविश्वेश के मन को प्रसन्न करने वाली हैं और काशीपुर की आधीश्वरी हैं, जो हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती मातान्नपूर्णेश्वरी
वेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी ।
सर्वानन्दकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥६॥

urvīsarvajaneśvarī jayakarī mātā kṛpāsāgarī
veṇīnīlasamānakuntaladharī nityānnadāneśvarī ।
sarvānandakarī sadā śubhakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 6 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी उर्वी, सभी जनों की ईश्वरी हैं, वे वेणीनील की तरह नीले और लम्बे केशों की लहर हैं, और हमें हमेशा अन्न की दान करने वाली ईश्वरी हैं। वे सभी आनंद का स्रोत हैं और हमें सदा शुभकारक हैं, काशीपुर की आधीश्वरी हैं, और हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

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आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी
काश्मीरात्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी ।
कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥७॥

ādikṣāntasamastavarṇanakarī śambhostribhāvākarī
kāśmīrātrijaleśvarī trilaharī nityāṅkurā śarvarī ।
svargadvārakavāṭapāṭanakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 7 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी आदि से लेकर अंत तक समस्त वर्णन करने वाली हैं, वे भगवान शंकर के त्रिभुवन आकारक हैं, और वे काश्मीर के त्रिजलेश्वरी हैं, जो त्रिलहरी और नित्याङ्कुरा हैं। वे कामनाओं को पूरा करने वाली हैं, जनों के उत्थान करने वाली हैं, काशीपुर की आधीश्वरी हैं, और हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरी
वामं स्वादुपयोधरप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी ।
भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥८॥

devī sarvavicitraratnaracitā dākṣāyaṇī sundarī
vāme svādupayodharā priyakarī saubhāgyamāheśvarī ।
bhaktābhīṣṭakarī sadā śubhakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 8 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी देवी हैं, जिन्होंने सभी प्रकार के विचित्र रत्नों से युक्त हैं, वे दाक्षायणी सुन्दरी हैं, और वामाचार में स्वादुपयोधर को प्रिय हैं, वे सौभाग्यमाहेश्वरी हैं, भक्तों के इच्छाओं को पूरा करने वाली हैं, हमेशा शुभकारक हैं, काशीपुर की आधीश्वरी हैं, और हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरी
चन्द्रार्काग्निसमानकुन्तलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी ।
मालापुस्तकपाशासाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥९॥

candrārkānalakoṭikoṭisadṛśā candrāṃśubimbādharī
candrārkāgnisamānakuṇḍaladharī candrārkavarṇeśvarī
। mālāpustakapāśasāṅkuśadharī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 9 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी चन्द्रार्क कोटि-कोटि सदृशा हैं, उनके मुख पर चंद्रमा के बिम्ब की तरह चमकता है, उनके केश सूर्य के जैसे होते हैं, और उनका वर्ण चंद्रमा के समान होता है। वे माला, पुस्तक, पाश, और आङ्कुश के साथ धारण करती हैं, काशीपुर की आधीश्वरी हैं, और हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरी
साक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरश्रीधरी ।
दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी
भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥१०॥

kṣatratrāṇakarī mahā’bhayakarī mātā kṛpāsāgarī
sākṣānmokṣakarī sadā śivakarī viśveśvaraśrīdharī ।
dakṣākrandakarī nirāmayakarī kāśīpurādhīśvarī
bhikṣāṃ dehi kṛpāvalambanakarī mātānnapūrṇeśvarī ॥ 10 ॥

हिंदी – माता अन्नपूर्णेश्वरी क्षत्रत्राण करने वाली हैं, महाभय करने वाली हैं, और कृपा के समुंदर हैं। वे साक्षात् मोक्ष का कारण हैं, हमेशा भगवान शिव की पूजा करने वाली हैं, विश्वेश्वरश्रीधरी हैं, और दक्ष के रोने को शांत करने वाली हैं, काशीपुर की आधीश्वरी हैं, और हमें भिक्षा करने की कृपा देती हैं।

 

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।
ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥११॥

annapūrṇe sadāpūrṇe śaṅkaraprāṇavallabhe ।
jñānavairāgyasiddhyarthaṃ bhikṣāṃ dehi ca pārvati ॥ 11 ॥

हिंदी – यह श्लोक माता अन्नपूर्णेश्वरी को समर्पित है और इसमें उनकी महिमा और महत्व का वर्णन किया गया है। इसमें कहा जा रहा है कि माता पार्वती, जो अन्नपूर्णा हैं, हमें ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति के लिए भिक्षा दें। वे शंकर के प्राण हैं और हमें हमेशा पूर्णता में रखती हैं।

 

माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।
बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥१२॥

mātā ca pārvatī devī pitā devo maheśvaraḥ ।
bāndhavāḥ śivabhaktāśca svadeśo bhuvanatrayam ॥ 12 ॥

हिंदी – यह श्लोक माता पार्वती की महिमा को व्यक्त करता है। इसमें कहा जा रहा है कि पार्वती माता की पुत्री हैं और महेश्वर (भगवान शिव) उनके पिता हैं। वे शिव के भक्त हैं और सभी भूलों के बावजूद भी उनके बान्धव हैं। वे स्वदेश के लोग हैं और तीनों लोकों का भव्य त्रिभुवन के प्रति समर्पित हैं।

 

“इति श्रीमत् शङ्कराचार्य विरचितं अन्नपूर्णा स्तोत्रं सम्पूर्णम्।”

“Iti śrīmat śaṅkarācārya viracitaṁ annapūrṇā stotraṁ sampūrṇam.”

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