मंगल गीतम् | Mangal Gitam

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Mangal Gitam

Mangal Gitam भारतीय भक्ति साहित्य में एक महत्वपूर्ण रचना है, जिसे महान कवि श्री जयदेव ने लिखा है। यह गीत श्री हरि (भगवान विष्णु) की महिमा का वर्णन करता है और उनकी दिव्य लीलाओं को प्रस्तुत करता है। मंगल गीतम् को “गीतगोविंद” के कुछ अंशों के रूप में भी जाना जाता है, जो जयदेव की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है।

इस गीत का हर एक श्लोक भगवान विष्णु के विभिन्न रूपों और उनके अद्भुत कार्यों का गुणगान करता है। यह गीत विशेष रूप से उनकी करूणा, सौंदर्य और शक्ति को दर्शाता है। इसमें भगवान के अवतारों जैसे राम और कृष्ण की लीलाओं का उल्लेख है, जो भक्तों के लिए प्रेरणा और भक्ति का स्रोत हैं।

Mangal Gitam

मंगल गीतम् (Mangal Gitam)

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए ।
कलितललितवनमाल जय जय देव हरे ।।1।।

दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए ।
मुनिजनमानsहंस जय जय देव हरे ।।2।।

कालियविषधरगञ्जन जनरञ्जन ए ।
यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे ।।3।।

मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए ।
सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे ।।4।।

अमलकमलदललोचन भवमोचन ए ।
त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे ।।5।।

जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए ।
समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे ।।6।।

अभिनवजलधरसुंदर धृतमंदर ए ।
श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे ।।7।।

तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए ।
कुरु कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे ।।8।।

श्रीजयदेवकवेरूदितमिदं कुरुते मुदम् ।
मंगलमञ्जुलगीतं जय जय देव हरे ।।9।।

राधेकृष्ण हरि गोविन्द गोपाल
हरि वसुदेव बाल भज नन्द दुलाल
जय जय देव हरे ।।10।।

इति श्री जयदेव बिरचितं मंगल गीतं संपूर्णम्

मंगल गीतम् हिंदी अर्थ सहित (Mangal Gitam)

श्रितकमलाकुचमण्डल धृतकुण्डल ए।
कलितललितवनमाल जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जिनकी शरण में कमल जैसे सुंदर वक्षस्थल है, जो कानों में सुंदर कुंडल धारण किए हुए हैं और जिनके गले में आकर्षक वनमाला सुशोभित है, उनकी जय हो।

दिनमणिमण्डलमण्डन भवखण्डन ए।
मुनिजनमानसहंस जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जो सूर्य के समान प्रकाशवान हैं, जो संसार के दुखों को नष्ट करते हैं और मुनियों के हृदय में हंस रूप में विद्यमान रहते हैं, उनकी जय हो।

कालियविषधरगञ्जन जनरञ्जन ए।
यदुकुलनलिनदिनेश जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जो कालिया नाग का विनाश करने वाले, सबका मनोरंजन करने वाले और यदुकुल रूपी कमल के सूर्य हैं, उनकी जय हो।

मधुमुरनरकविनाशन गरुडासन ए।
सुरकुलकेलिनिदान जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जो मधु, मुर और नरकासुर जैसे दानवों का विनाश करने वाले, गरुड़ पर विराजमान और देवताओं के आनंद का स्रोत हैं, उनकी जय हो।

अमलकमलदललोचन भवमोचन ए।
त्रिभुवनभवननिधान जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जिनकी आंखें शुद्ध कमल के समान हैं, जो संसार के बंधनों को मुक्त करने वाले और तीनों लोकों के आश्रय स्थान हैं, उनकी जय हो।

जनकसुताकृतभूषण जितदूषण ए।
समरशमितदशकण्ठ जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जो सीता जी के गले का भूषण हैं, जिनका रूप दोष रहित है और जिन्होंने युद्ध में रावण का अंत किया, उनकी जय हो।

अभिनवजलधरसुंदर धृतमंदर ए।
श्रीमुखचन्द्रचकोर जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! जो नए मेघ के समान सुंदर, मंदर पर्वत को धारण करने वाले और जिनका मुख चंद्रमा के समान सुंदर है, उनकी जय हो।

तव चरणे प्रणता वयमिति भावय ए।
कुरु कुशलं प्रणतेषु जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे प्रभु! हम आपके चरणों में प्रणाम करते हैं। कृपया हमारी रक्षा करें और हमें कुशलता प्रदान करें। आपकी जय हो।

श्रीजयदेवकवेरूदितमिदं कुरुते मुदम्।
मंगलमञ्जुलगीतं जय जय देव हरे।।

अर्थ:
यह मंगलमय और सुंदर गीत, जिसे कवि जयदेव ने रचा है, आनंद उत्पन्न करता है। हे प्रभु, आपकी जय हो।

राधेकृष्ण हरि गोविन्द गोपाल।
हरि वसुदेव बाल भज नन्द दुलाल।
जय जय देव हरे।।

अर्थ:
हे राधा-कृष्ण, हरि, गोविंद, गोपाल, वसुदेव के पुत्र और नंदलाल! आपकी जय हो।

इति श्री जयदेव बिरचितं मंगल गीतं संपूर्णम्

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मंगल गीतम् की विशेषताएँ (Mangal Gitam)

1. दिव्य भक्ति का संदेश: इस गीत के माध्यम से कवि ने भगवान के प्रति अनन्य भक्ति और आत्मसमर्पण का संदेश दिया है।

2. संगीतमय शैली: यह गीत काव्यात्मक और संगीतात्मक रूप से रचा गया है, जो इसे अत्यंत मधुर और मनमोहक बनाता है।

3. संस्कृत भाषा का सौंदर्य: मंगल गीतम् में संस्कृत भाषा का अद्वितीय प्रयोग हुआ है, जो इसे साहित्यिक दृष्टि से उत्कृष्ट बनाता है।

4. सर्वजनप्रियता: यह गीत धार्मिक अनुष्ठानों, त्योहारों और विशेष अवसरों पर गाया जाता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक शांति और आनंद की अनुभूति होती है।

मंगल गीतम् का प्रभाव (Mangal Gitam)

इस गीत को सुनने और गाने से मन में सकारात्मकता, शांति और भक्ति का भाव जागृत होता है। यह हमें भगवान के प्रति आस्था और उनके मार्गदर्शन में चलने की प्रेरणा देता है।

आपके जीवन में भक्ति और शांति लाने वाला यह गीत भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है। इसे पढ़ने और गाने से हमारी परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों की गहराई का अनुभव होता है।

निष्कर्ष (Mangal Gitam)

मंगल गीतम् केवल एक भक्ति गीत नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच एक अनमोल सेतु है। यह हमें यह सिखाता है कि ईश्वर की आराधना और उनकी लीलाओं का चिंतन जीवन को मंगलमय बना सकता है। आप इस अद्भुत रचना को अपने जीवन में शामिल कर भक्ति और शांति का अनुभव कर सकते हैं।

RN Tripathy

लेखक परिचय – [रुद्रनारायण त्रिपाठी] मैं एक संस्कृत प्रेमी और भक्तिपूर्ण लेखन में रुचि रखने वाला ब्लॉग लेखक हूँ। AdyaSanskrit.com के माध्यम से मैं संस्कृत भाषा, न्याय दर्शन, भक्ति, पुराण, वेद, उपनिषद और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर लेख साझा करता हूँ, ताकि लोग हमारे प्राचीन ज्ञान और संस्कृति से प्रेरणा ले सकें।

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