मां कालरात्रि की पूजा विधि, मंत्र, भोग और महत्व
नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। उनका स्वरूप उग्र दिखाई देता है, किंतु भक्तों के लिए वे कल्याणकारी और शुभ फल देने वाली मानी जाती हैं। इसी कारण उन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।
मां कालरात्रि का स्वरूप साहस, शक्ति और निर्भयता का प्रतीक माना जाता है। उनकी उपासना में भक्त अपने भय और संकट दूर करने की प्रार्थना करते हैं। शारदीय नवरात्रि में सप्तमी तिथि को उनकी विशेष पूजा की जाती है। 2026 में यह पूजा 18 अक्टूबर को होगी।
मां कालरात्रि का स्वरूप
मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है। उनका वर्ण श्याम है और उनके केश खुले हुए हैं। वे चतुर्भुजा हैं। उनके एक हाथ में खड्ग और दूसरे हाथ में लौहवज्र बताया गया है। अन्य हाथों में अभय और वर मुद्रा मानी जाती है।
उनका वाहन गर्दभ है। उनके उग्र स्वरूप के कारण उनका नाम कालरात्रि पड़ा। धार्मिक मान्यताओं में उनका यह स्वरूप दुष्ट शक्तियों के विनाश और भक्तों की रक्षा से जुड़ा हुआ है।
नवरात्रि में मां कालरात्रि की पूजा कब होती है?
मां कालरात्रि की पूजा नवरात्रि की सप्तमी तिथि को की जाती है। यह नवरात्रि के सातवें दिन होती है। भक्त इस दिन श्रद्धापूर्वक मां की आराधना करते हैं।
शारदीय नवरात्रि 2026 में मां कालरात्रि की पूजा 18 अक्टूबर, रविवार को होगी।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
मां कालरात्रि की पूजा के लिए सबसे पहले पूजा-स्थान को स्वच्छ करें। स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मां के सामने दीप प्रज्वलित करें।
इसके बाद मां कालरात्रि का ध्यान करके उन्हें पुष्प, धूप, दीप, फल और नैवेद्य अर्पित करें। पूजा में श्रद्धा और सात्त्विक भाव को विशेष महत्व दें।
इसके बाद मां कालरात्रि के मंत्र का जाप करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार मां की स्तुति और प्रार्थना भी की जा सकती है।
पूजा के अंत में मां की आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों के लिए सुख, शांति, आरोग्य तथा भय से मुक्ति की प्रार्थना करें।
मां कालरात्रि का मंत्र
मां कालरात्रि की उपासना में इस मंत्र का जाप किया जाता है—
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करते हुए मां का ध्यान किया जाता है।
मां कालरात्रि को कौन-सा भोग लगाएं?
मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ और गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाने की मान्यता प्रचलित है। सप्तमी तिथि पर भक्त मां को गुड़ अर्पित करते हैं।
इसके साथ फल और अन्य सात्त्विक नैवेद्य भी अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा में वही सामग्री अर्पित करना उचित है जो श्रद्धापूर्वक और शुद्ध भाव से उपलब्ध हो।
मां कालरात्रि की पूजा का महत्व
मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का उग्र स्वरूप माना जाता है। उनके स्वरूप में शक्ति और संरक्षण दोनों भाव दिखाई देते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां की उपासना करने से साधक के भीतर भय का नाश होता है और वह कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस प्राप्त करता है।
मां कालरात्रि को शुभ फल प्रदान करने वाली देवी भी माना गया है। इसी कारण उनका एक नाम शुभंकरी है।
उनकी आराधना भक्त को अपने भीतर के भय, नकारात्मक विचारों और दुर्बलताओं पर विजय प्राप्त करने की प्रेरणा देती है।
मां कालरात्रि की पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें
मां की पूजा में स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। पूजा-स्थान को पहले अच्छी तरह स्वच्छ कर लें।
नैवेद्य और पूजन सामग्री शुद्ध रखें। यदि किसी विशेष पूजा-विधान या अनुष्ठान की जानकारी न हो तो सामान्य रूप से मां का ध्यान करके मंत्र जाप और पूजा करना पर्याप्त है।
नवरात्रि के व्रत का पालन करने वाले साधक अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार सात्त्विक आहार तथा पूजा-विधान का पालन कर सकते हैं।
मां कालरात्रि से जुड़ी मान्यता
धार्मिक परंपरा में मां कालरात्रि को देवी पार्वती के उग्र स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। एक मान्यता के अनुसार, शुम्भ और निशुम्भ जैसे असुरों के विनाश के लिए देवी ने यह उग्र स्वरूप धारण किया था।
उनका स्वरूप देखने में भयंकर है, लेकिन भक्तों के लिए वे कल्याणकारी मानी जाती हैं। इसी विरोधाभास के कारण मां कालरात्रि की उपासना में शक्ति के साथ करुणा का भाव भी जुड़ा हुआ है।
मां कालरात्रि की पूजा से संबंधित प्रश्न
मां कालरात्रि की पूजा नवरात्रि के किस दिन होती है?
मां कालरात्रि की पूजा नवरात्रि की सप्तमी तिथि को होती है। वे नवदुर्गा का सातवां स्वरूप हैं।
मां कालरात्रि का मंत्र क्या है?
मां कालरात्रि का प्रमुख मंत्र है— ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
मां कालरात्रि को कौन-सा भोग लगाना चाहिए?
मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़ से बने प्रसाद का भोग लगाने की मान्यता है। इसके साथ फल और सात्त्विक नैवेद्य भी अर्पित किए जा सकते हैं।
2026 में मां कालरात्रि की पूजा कब होगी?
शारदीय नवरात्रि 2026 में मां कालरात्रि की पूजा 18 अक्टूबर 2026, रविवार को सप्तमी तिथि पर होगी।











