महाषष्ठी क्या है? महत्त्व, धार्मिक मान्यता एवं पूजा विधि
शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा का समय माँ दुर्गा की आराधना के लिए विशेष महत्त्व रखता है। इसी पर्व में महाषष्ठी का आगमन होता है। यह देवी दुर्गा के स्वागत, आवाहन और पूजन की तैयारियों से जुड़ा पावन दिवस है। महाषष्ठी से दुर्गा पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों का आरम्भ होता है। इस दिन भक्त माँ दुर्गा की आराधना करके उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।
महाषष्ठी क्या है?
महाषष्ठी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। इसे दुर्गा षष्ठी भी कहा जाता है। शारदीय दुर्गा पूजा में इस तिथि का विशेष स्थान है।
महाषष्ठी को देवी दुर्गा के बोधन अर्थात् जागरण का दिवस माना जाता है। इस दिन देवी का आवाहन करके उन्हें पूजन के लिए आमन्त्रित किया जाता है। परम्परागत रूप से इस दिन कल्पारम्भ, बोधन, आमन्त्रण और अधिवास जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं।
महाषष्ठी का धार्मिक महत्त्व
महाषष्ठी केवल दुर्गा पूजा के आरम्भ का दिवस नहीं है, अपितु यह देवी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और समर्पण का पर्व भी है। इस दिन से वातावरण में देवी आराधना की विशेष भावना दिखाई देने लगती है।
1. माँ दुर्गा के बोधन का दिवस
महाषष्ठी का सबसे प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान देवी बोधन है। बोधन का अर्थ है जागृत करना। परम्परा के अनुसार, इस दिन देवी दुर्गा का विधिपूर्वक आवाहन किया जाता है।
2. दुर्गा पूजा का शुभारम्भ
महाषष्ठी से दुर्गा पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों का आरम्भ होता है। मन्दिरों और पूजा मण्डपों में देवी की आराधना की जाती है। भक्त माँ दुर्गा के दर्शन करते हैं और आगामी पूजा के लिए श्रद्धापूर्वक सम्मिलित होते हैं।
3. देवी के स्वागत का पर्व
महाषष्ठी को माँ दुर्गा के स्वागत से जोड़कर देखा जाता है। इस दिन देवी को पूजन के लिए आमन्त्रित करने की परम्परा है। यह भाव भक्तों के मन में श्रद्धा, आनन्द और भक्ति का संचार करता है।
महाषष्ठी की पूजा विधि
महाषष्ठी के दिन देवी दुर्गा की पूजा घर पर भी श्रद्धापूर्वक की जा सकती है। विभिन्न क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि अलग-अलग हो सकती है। दुर्गा पूजा के पारम्परिक अनुष्ठान सामान्यतः पुरोहित के मार्गदर्शन में सम्पन्न किए जाते हैं।
1. प्रातःकाल स्नान एवं पूजा स्थल की स्वच्छता
प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को स्वच्छ करें और माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। पूजा के लिए पुष्प, दीपक, धूप, फल और नैवेद्य आदि सामग्री एकत्र करें।
2. पूजा का संकल्प लें
माँ दुर्गा के समक्ष श्रद्धापूर्वक बैठें। मन में पूजा का संकल्प लें और देवी से परिवार की सुख-शान्ति तथा कल्याण की प्रार्थना करें।
3. माँ दुर्गा का पूजन करें
देवी को पुष्प अर्पित करें। धूप और दीप प्रज्वलित करें। फल तथा नैवेद्य समर्पित करके अपनी श्रद्धा के अनुसार माँ दुर्गा की आराधना करें।
4. देवी बोधन एवं आमन्त्रण
महाषष्ठी के पारम्परिक दुर्गा पूजा अनुष्ठानों में देवी बोधन का विशेष स्थान है। यह अनुष्ठान सामान्यतः सायंकाल किया जाता है। परम्परा में बिल्व वृक्ष अथवा उसकी शाखा के समीप देवी का बोधन किया जाता है।
इसके पश्चात् देवी का आमन्त्रण और अधिवास किया जाता है। इन अनुष्ठानों के माध्यम से देवी को आगामी पूजा के लिए आमन्त्रित किया जाता है। इनकी विस्तृत विधि स्थानीय पूजा पद्धति के अनुसार सम्पन्न होती है।
5. आरती एवं प्रार्थना
पूजा के अन्त में माँ दुर्गा की आरती करें। देवी के चरणों में पुष्प अर्पित करके परिवार के कल्याण और जीवन में सद्बुद्धि की प्रार्थना करें। अपनी श्रद्धा के अनुसार दिन का शेष समय देवी स्मरण एवं भक्ति में व्यतीत करें।
महाषष्ठी से जुड़े प्रमुख अनुष्ठान
महाषष्ठी के अवसर पर दुर्गा पूजा की परम्परा में कुछ विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। इनमें कल्पारम्भ, बोधन, आमन्त्रण और अधिवास प्रमुख हैं।
| अनुष्ठान | अर्थ एवं महत्त्व |
|---|---|
| कल्पारम्भ | दुर्गा पूजा के आरम्भ का संकल्प |
| बोधन | देवी दुर्गा का पारम्परिक जागरण |
| आमन्त्रण | देवी को पूजा के लिए आमन्त्रित करना |
| अधिवास | पूजा से पूर्व देवी के पूजन स्थल का संस्कार |
इन अनुष्ठानों के माध्यम से आगामी दिनों की दुर्गा पूजा की तैयारी की जाती है।
महाषष्ठी से संबंधित सामान्य प्रश्न (FAQs)
1. महाषष्ठी कब मनाई जाती है?
महाषष्ठी आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। यह शारदीय दुर्गा पूजा के प्रमुख आरम्भिक दिवसों में से एक है।
2. महाषष्ठी को दुर्गा षष्ठी क्यों कहा जाता है?
इस दिन देवी दुर्गा की आराधना और बोधन के साथ दुर्गा पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों का आरम्भ होता है। इसी कारण इसे दुर्गा षष्ठी भी कहा जाता है।
3. महाषष्ठी पर कौन-कौन से अनुष्ठान किए जाते हैं?
महाषष्ठी पर कल्पारम्भ, देवी बोधन, आमन्त्रण और अधिवास जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं। इनकी विधि विभिन्न पूजा परम्पराओं में भिन्न हो सकती है।
4. क्या महाषष्ठी की पूजा घर पर की जा सकती है?
हाँ, भक्त घर पर माँ दुर्गा की प्रतिमा अथवा चित्र के समक्ष पुष्प, दीप, धूप और नैवेद्य अर्पित करके पूजा कर सकते हैं। विस्तृत पारम्परिक अनुष्ठानों के लिए पुरोहित का मार्गदर्शन लिया जा सकता है।











