श्री गणेश प्रातः स्मरण स्तोत्रम् — हिंदी अर्थ सहित पूरा पाठ
सुबह-सुबह आँख खुलते ही अगर मन किसी एक नाम पर टिके, तो ज़्यादातर घरों में वो नाम गणपति बप्पा का ही होता है। यही वजह है कि “श्री गणेश प्रातः स्मरण स्तोत्रम्” सदियों से लोगों की सुबह की दिनचर्या का हिस्सा रहा है। आज हम यही स्तोत्र, इसका शब्द-दर-शब्द नहीं बल्कि सरल और सीधा हिंदी अर्थ, और साथ में इसे पढ़ने का सही तरीका भी आपके साथ शेयर कर रहे हैं।
अगर आप रोज़ सुबह कोई छोटा लेकिन असरदार पाठ ढूंढ रहे थे, तो यह लेख आपके लिए ही है।
Shri Ganesh Pratah Smaran Stotram
प्रातः स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं
सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् ।
उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्डं
आखण्डलादिसुरनायकबृन्दवन्द्यम् ॥ १ ॥
प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानं
इच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम् ।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिप यज्ञसूत्रं
पुत्रं विलासचतुरं शिवयोः शिवाय ॥ २ ॥
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोक-
-दावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम् ।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहं
उत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य ॥ ३ ॥
श्लोकत्रयमिदं पुण्यं सदा साम्राज्यदायकम् ।
प्रातरुत्थाय सततं यः पठेत्प्रयतः पुमान् ॥ ४ ॥
।। इति श्री गणेश प्रातःस्मरण स्तोत्रम् ।।
स्तोत्र क्यों पढ़ा जाता है?
गणेश जी को हर शुभ काम से पहले पूजा जाता है, और इसी सोच के साथ यह स्तोत्र बनाया गया है — दिन की शुरुआत में सबसे पहले विघ्नहर्ता का स्मरण करना, ताकि पूरा दिन बिना रुकावट के निकले।
नीचे तीनों मुख्य श्लोक और चौथा फलश्रुति श्लोक (यानी पाठ का फल बताने वाला श्लोक) क्रम से दिए गए हैं, हर श्लोक के ठीक नीचे उसका आसान भावार्थ है।
श्री गणेश प्रातः स्मरण स्तोत्रम् भावार्थ सहित
श्लोक १ — भावार्थ सहित
प्रातः स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं
सिन्दूरपूरपरिशोभितगण्डयुग्मम् ।
उद्दण्डविघ्नपरिखण्डनचण्डदण्डं
आखण्डलादिसुरनायकबृन्दवन्द्यम् ॥ १ ॥
अर्थ: मैं सुबह-सुबह उन गणनाथ (गणेश जी) का स्मरण करता हूँ, जो अनाथों के सच्चे सहारे हैं। जिनके दोनों गाल सिंदूर से सुशोभित हैं, जो बड़े से बड़े विघ्न को अपने प्रचंड दंड (शक्ति) से नष्ट कर देते हैं, और जिन्हें इंद्र जैसे सारे देवता भी मिलकर वंदन करते हैं।
श्लोक २ — भावार्थ सहित
प्रातर्नमामि चतुराननवन्द्यमानं
इच्छानुकूलमखिलं च वरं ददानम् ।
तं तुन्दिलं द्विरसनाधिप यज्ञसूत्रं
पुत्रं विलासचतुरं शिवयोः शिवाय ॥ २ ॥
अर्थ: मैं सुबह उन्हें नमन करता हूँ जिन्हें ब्रह्मा जी स्वयं वंदन करते हैं, जो भक्तों की हर इच्छा के अनुसार मनचाहा वरदान देते हैं। जिनका पेट बड़ा है, जिन्होंने सर्पराज को यज्ञोपवीत (जनेऊ) की तरह धारण किया है — शिव-पार्वती के उस चतुर और आनंदमय पुत्र को मैं अपने कल्याण के लिए नमन करता हूँ।
श्लोक ३ — भावार्थ सहित
प्रातर्भजाम्यभयदं खलु भक्तशोक-
-दावानलं गणविभुं वरकुञ्जरास्यम् ।
अज्ञानकाननविनाशनहव्यवाहं
उत्साहवर्धनमहं सुतमीश्वरस्य ॥ ३ ॥
अर्थ: मैं सुबह उन गजमुख गणपति की भक्ति करता हूँ, जो भक्तों को निर्भय बनाते हैं और उनके दुखों को दावानल की तरह जला देते हैं। जो अज्ञान रूपी घने जंगल को अग्नि की तरह भस्म कर देते हैं, और जो मेरे उत्साह को हमेशा बढ़ाने वाले, भगवान शिव के पुत्र हैं।
श्लोक ४ — फलश्रुति (पाठ का फल)
श्लोकत्रयमिदं पुण्यं सदा साम्राज्यदायकम् ।
प्रातरुत्थाय सततं यः पठेत्प्रयतः पुमान् ॥ ४ ॥
अर्थ: यह तीनों पुण्यदायक श्लोक हमेशा राज्य-सम्मान और सुख देने वाले हैं। जो व्यक्ति सुबह उठकर मन-शुद्धि के साथ नियमित रूप से इनका पाठ करता है, उसे इसका पूरा फल मिलता है।
॥ इति श्री गणेश प्रातःस्मरण स्तोत्रम् ॥
इस स्तोत्र को पढ़ने का सही तरीका
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर, स्नान के बाद पढ़ना सबसे अच्छा माना जाता है
- अगर सुबह समय न मिले, तो घर से निकलने या कोई भी नया काम शुरू करने से पहले भी पढ़ सकते हैं
- पाठ करते समय मन शांत और एकाग्र रखें, जल्दबाज़ी में न पढ़ें
- चाहें तो गणपति जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर पढ़ें, इससे ध्यान बना रहता है
इस स्तोत्र से जुड़े फायदे
लोग मानते हैं कि रोज़ इसका पाठ करने से दिन की शुरुआत में मन को स्थिरता मिलती है और काम में आने वाली रुकावटें कम महसूस होती हैं। यह पूरी तरह श्रद्धा और मान्यता पर आधारित है, कोई वैज्ञानिक दावा नहीं है — लेकिन जिन घरों में यह परंपरा है, वहाँ इसे पीढ़ी दर पीढ़ी निभाया जाता है।
आखिर में एक बात
तीन छोटे श्लोक और एक फलश्रुति — इतना छोटा स्तोत्र होते हुए भी इसका भाव बहुत गहरा है। अगली सुबह जब आप उठें, तो इसे एक बार पढ़कर देखिए, दिन की शुरुआत का एहसास खुद बदला हुआ लगेगा।
FAQs
क्या यह स्तोत्र रोज़ पढ़ा जा सकता है?
हाँ, इसे रोज़ सुबह पढ़ने की ही परंपरा है, इसीलिए इसका नाम “प्रातः स्मरण स्तोत्रम्” है।
क्या इसे पढ़ने के लिए कोई खास पूजा-सामग्री चाहिए?
नहीं, इसे बिना किसी सामग्री के भी श्रद्धा से पढ़ा जा सकता है। चाहें तो गणपति जी की तस्वीर के सामने पढ़ें, यह पूरी तरह वैकल्पिक है।
इस स्तोत्र में कितने श्लोक हैं?
इसमें कुल ३ मुख्य श्लोक हैं और एक चौथा फलश्रुति श्लोक है, जो पाठ का महत्व बताता है।











